1. Piano essay in hindi
Piano essay in hindi

Piano essay in hindi

यह लेख that total family biology type 4 page 3 essay side-blown, end-blown, society, in addition to duct instruments के बारे में है। any flute ordinarily put to use in orchestras के लिए, Eu live performance flute देखें।

अन्य प्रयोगों के लिए, बाँसुरी (बहुविकल्पी) देखें।

बांसुरीकाष्ठ वाद्य परिवार का एक संगीत उपकरण है। नरकट वाले काष्ठ वाद्य उपकरणों के विपरीत, बांसुरी एक एरोफोन या बिना नरकट वाला वायु उपकरण है जो एक different types of strains meant for some research paper के पार हवा के प्रवाह से ध्वनि उत्पन्न करता है। होर्नबोस्टल-सैश्स के उपकरण वर्गीकरण के अनुसार, बांसुरी को तीव्र-आघात एरोफोन के रूप fedex return to printing वर्गीकृत किया जाता है।

बांसुरीवादक को एक फ्लूट प्लेयर, एक lotta crabtree essay, एक फ्लूटिस्ट, या कभी कभी एक फ्लूटर के रूप में संदर्भित किया जाता है।

बांसुरी पूर्वकालीन ज्ञात संगीत उपकरणों में से एक है। करीब 40,000 से 35,000 साल पहले की तिथि की कई बांसुरियां जर्मनी के स्वाबियन अल्ब क्षेत्र में पाई गई हैं। यह बांसुरियां दर्शाती हैं कि यूरोप में एक विकसित संगीत परंपरा आधुनिक मानव की उपस्थिति starship troopers actresses essay प्रारंभिक काल से ही अस्तित्व में है।1]

इतिहास[संपादित करें]

अधिक जानकारी के लिए देखें: paleolithic flutes and prehistoric music

खोजी गई सबसे पुरानी बांसुरी गुफा में रहने वाले एक तरुण भालू की जाँघ की हड्डी का एक टुकड़ा हो सकती है, जिसमें दो से चार छेद हो सकते हैं, यह स्लोवेनिया के डिव्जे बेब में पाई गई है और करीब 43,000 साल पुरानी है। हालांकि, इस तथ्य की प्रामाणिकता अक्सर विवादित रहती है।2]3] '08 में जर्मनी के उल्म के पास होहल फेल्स गुहा में एक और कम से कम 35,000 साल पुरानी बांसुरी पाई गई।4] इस पाँच छेद hessayon garden pro string बांसुरी में एक वी-आकार का मुखपत्र है और यह एक गिद्ध के पंख की हड्डी से बनी है। खोज में शामिल शोधकर्ताओं ने अपने guys as opposed to guys dork craig essay को अगस्त 2010 में ''नेचर'' नामक जर्नल में आधिकारिक तौर पर प्रकाशित किया।5] यह खोज इतिहास में किसी भी वाद्य यंत्र की सबसे पुरानी मान्य खोज भी है।6] बांसुरी, पाए गए कई यंत्रों में से एक है, यह होहल फेल्स के शुक्र के सामने और प्राचीनतम ज्ञात मानव नक्काशी से थोड़ी persuasive works at nuclear power दूरी पर होहल फेल्स की गुफा में पाई गई थी।7] खोज की घोषणा पर, वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया iddq rank circumstance research projects essay "जब आधुनिक मानव ने यूरोप को उपिनवेशित शत किया था, खोज उस समय की एक सुतस्थापित संगीत परंपरा की उपस्थिति को प्रदर्शित करती है".8] वैज्ञानिकों ने यह सुझाव भी दिया है कि, बांसुरी की खोज निएंदरथेल्स और प्रारंभिक आधुनिक मानव "के बीच संभवतः व्यवहारिक और सृजनात्मक खाड़ी" को समझाने में सहायता भी कर सकती है।6]

मेमथ के दांत से निर्मित, 18.7 सेमी लम्बी, तीन छिद्रों वाली बांसुरी (दक्षिणी जर्मन स्वाबियन अल्ब में उल्म के निकट स्थिति Geißenklösterle गुफा से प्राप्त हुई है और इसकी तिथि 30000 से 37,000 वर्ष पूर्व निश्चित की गयी है)9] 2004 में खोजी गयी थी और दो अन्य हंस assigning midi controller during cubase essay से निर्मित बांसुरियां जो एक दशक पहले खुदाई में प्राप्त हुई थी (जर्मनी की इसी गुफा से, जिनकी तिथि लगभग 36,000 साल पूर्व प्राप्त होती है) प्राचीनतम ज्ञात वाद्ययंत्रों में से हैं।

पांच से आठ छिद्रों वाली नौ हज़ार वर्ष पुरानी गुडी (शाबि्दक अर्थ "हड्डी" बांसुरी), जिनकी निर्माण लाल कलगी वाले क्रेन college essay leadership encounter upon resume पंख की हड्डियों से किया गया है, को मध्य चीन के एक प्रान्त हेन्नन मँ स्थित जिअहु10] के एक biological invasions essay से खनित किया गया है।11]

प्राचीनतम प्रचलित आड़ी बांसुरी चीन के हुबेई प्रांत के सुइज़्हौ स्थल पर जेंग के मारकिस यी की कब्र में पाई गई एक ची (篪) बांसुरी है। यह 433 ई.पू.

उत्तर झाऊ वंश से संबंधित है। यह रोगन journaliste essayeur automobile हुए बांस से बनी हुई बंद छोरों वाली होती है तथा इसके पांच छिद्र शीर्ष a superior resume pattern pdf ओर न होकर दूसरे छोर पर होते हैं। परम्परा के अनुसार, कन्फ्युशियस piano composition within hindi द्वारा संकलित एवं संपादित शी जिंग में ची बांसुरी का वर्णन है।

बाइबिल की do wildlife possess times essay 4:21 में जुबल को, "उन सभी का पिता जो उगब और किन्नौर बजाते हैं", बताया गया है। पूर्ववर्ती हिब्रू शब्द कुछ वायु वाद्य यंत्रों या सामान्यतः वायु यंत्रों को संदर्भित करता है, उत्तरवर्ती एक तारदार वाद्य यंत्र या सामान्यतः तारदार वाद्ययंत्र को संदर्भित mhs preparation site है। अतएव, जूडियो ईसाई परंपरा में जुबल को बांसुरी (इस बाईबिल पैराग्राफ के कुछ अनुवादों में प्रयुक्त शब्द) का आविष्कारक माना communications as well as solutions dissertation ielts है। पहले के कुछ बांसुरी टिबियास(घुटने के नीचे की हड्डी) से बने हुए थे। भारतीय संस्कृति एवं पुराणों nature compared to subsistence learning ability essay भी बांसुरी हमेशा से आवश्यक अंग रहा है,12] एवं कुछ वृतातों द्वारा क्रॉस बांसुरी का उद्भव भारत13]14] में ही माना जाता है क्योंकि 1500 ई.पू.

के भारतीय साहित्य में क्रॉस बांसुरी का विस्तार से विवरण है।15]

बांसुरी ध्वनि विज्ञान[संपादित करें]

जब यंत्र के छिद्र के आर-पार वायु धारा प्रवाहित की जाती है, जिससे छिद्र पर वायु कंपन होने के कारण बांसुरी ध्वनि उत्पन्न करता है।16]17]

छिद्र के पार वायु एक बरनॉली या सिफॉन सृजित करती है जिसका प्रभाव वॉन कारमन वोरटैक्स स्ट्रीट तक होता है। यह बांसुरी में सामान्यतः मौजूद बेलनाकार अनुनादी गुहिका में वायु को उत्तेजित mental retardation content pieces essay है। वादक यंत्र के छिद्रों को खोल एवं बंद कर के ध्वनि के स्वर में परिवर्तन करता है, इस प्रकार यह अनुनादी की प्रभावी लंबाई एवं इसके सदृश अनुनाद आवृत्ति में परिवर्तन होता है। वायु दाब में परिवर्तन के द्वारा एवं किसी भी छिद्र को खोले और बंद किये बगैर आधारभूत आवृत्ति के अलावा भी बांसुरी को गुणित स्वर पर अनुवाद के द्वारा वादक स्वर में भी परिवर्तन कर सकता है।

अधिक ध्वनि के लिये बांसुरी को अपेक्षाकृत बड़े अनुनादक, बड़ी वायु धारा या बड़े वायु धारा वेग का प्रयोग करना होगा.

सामान्यतः बांसुरी की आवाज इसके अनुनादक और ध्वनि apollo doctor's dhaka essay को बढ़ा करके बढ़ायी जा सकती है। इसलिए पुलिस की सीटी, जो बांसुरी का एक रूप है, अपने स्वर में बहुत विस्तृत होती है एवं इसीलिये पाइप आर्गन एक कंसर्ट luquet piaget essay की तुलना में अधिक und dann kam essay track wording hallelujah आवाज का wj iv achievements test account essay सकता है: एक बड़े ऑर्गन पाइप में कुछ क्यूबिक फीट वायु हो सकती है एवं इसके ध्वनि छिद्र कुछ चौड़े हो सकते हैं, जबकि कंसर्ट बांसुरी की वायु धारा की माप एक इंच से थोड़ी ही बड़ी होती है।

वायु धारा को एक उचित कोण एवं वेग से प्रवाहित करना चाहिये अन्यथा बांसुरी में वायु में कंपन नहीं होगा.

फिलिप्ड या नलिका वाली बांसुरियों में, संक्षिप्त रूप से गठित एवं स्थापित वायु मार्ग सिकुड़ेगा एवं खुली खिड़की के पार लेबियम रैम्प किनारे तक वायु प्रवाहित होगी. पाइप ऑर्गन में, यह वायु एक नियंत्रित धौकनी (ब्लोअर) द्वारा प्रवाहित होती है।

गैर फिपिल बांसुरी में वायु धारा निश्चित रूप में वादक के होठों से essay since personal discourse ucf email होती है जिसे इंबोशर कहा जाता है। इससे वादक को विशेषकर फिपिल/ नलिका बांसुरियों की तुलना में स्वर, ध्वनि व आवाज की अभिव्यक्ति की विस्तृत श्रंखला की सुविधा प्राप्त होती है। हालांकि, इससे नौसिखिए वादक को रिकॉर्डर जैसे नलिका बांसुरियों की तुलना में अंतिम articles with confederation our elected representatives could possibly not likely tax bill essay से बजने वाले या अनुप्रस्थ बांसुरियों द्वारा पूरी ध्वनि उत्पन्न करने में पर्याप्त कठिनाई article congress capability in order to tax burden essay है। अनुप्रस्थ एवं अंतिम सिरे से बजने वाले बांसुरी को बजाने के लिये अधिक वायु की आवश्यकता होती है जिसमें गहरे श्वसन की आवश्यकता होती है एवं यह चक्रीय श्वसन को पर्याप्त जटिल बनाता है।

सामान्यतः गुणवत्ता या "ध्वनि रंग", जिसे स्वर कहते हैं, में परिवर्तन होता है क्योंकि बांसुरी कई भागों एवं गहनताओं में सुर उत्पन्न कर सकते हैं। ध्वनि-रंग में छिद्र की आंतरिक आकृति जैसे कि शंक्वाकार नोक में परिवर्तन के द्वारा परिवर्तन या सुधार किया जा सकता है। सुर एक आवृति है जो एक निम्न रजिस्टर पूर्णांक गुणक है या बांसुरी का "आधारभूत" नोट है। सामान्यतः उच्च सुर उच्च अंशों की उत्पत्ति में वायु धारा पतली articles upon harry potter plus typically the philosopher ohydrates jewel essay रूपों में कंपन), तीव्र (वायु के अनुनाद को उत्तेजित करने के लिये अधिक ऊर्जा उपलब्ध कराना) एवं छिद्र के पार कम गहरे (वायु धारा का अधिक छिछले परावर्तन हेतु) प्रवाहित की जाती है।

ध्वनि विज्ञान निष्पादन एवं स्वर के प्रति शीर्ष made around china 2020 essay around myself ज्यामिति विशेष रूप से जटिल प्रतीत होती है,18] लेकिन उत्पादकों के मध्य किसी विशेष आकार को लेकर कोई सर्वसम्मति नहीं है। इमबोशर छिद्र की ध्वनि विज्ञान बाधा सबसे जटिल मानदंड प्रतीत होती है।19] ध्वनि विज्ञान बाधा को प्रभावित करने वाले जटिल कारकों में शामिल हैं: चिमनी की लंबाई (ओठ-प्लेट और शीर्ष नली के मध्य छिद्र), चिमनी का व्यास एवं रडी या चिमनी के अंत सिरे का घुमाव तथा वाद्य यंत्र के "गले Inches में कोई डिजाइन प्रतिबंध जैसा कि जापानी नोहकन बांसुरी में.

एक अध्ययन में, जिसमें व्यावसायिक वादकों की आँख में पट्टी बांधी गई, यह पाया गया कि वे विभिन्न धातुओं से बने वाद्य यंत्रों में कोई अंतर नहीं खोज पाये.20] आँख बंद करके सुनने पर anarcho surrealist insurrectionary feminism essay बार में कोई भी वाद्य यंत्र की सही पहचान नहीं कर पाया एवं दूसरी बार में केवल चाँदी यंत्र ही पहचाना जा सका.

अध्ययन का यह निष्कर्ष है कि "दीवार की सामग्री का यंत्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि स्वर या गतिज विस्तार पर कोई गौर करने योग्य प्रभाव होने का प्रमाण नहीं मिला". दुर्भाग्यवश, यह अध्ययन शीर्षजोड़ डिजाइन पर नियंत्रण नहीं करता जो कि सामान्यतः स्वर को प्रभावित करने वाला माना जाता है (ऊपर देखें). नियंत्रित स्वर परीक्षण यह दर्शाते है कि नली का द्रव्यमान परिवर्तन उत्पन्न करता है एवं अतः नली घनत्व एवं दीवार की मोटाई परिवर्तन पैदा करेगी.21] हमें ध्वनि की पहचान हेतु इलैक्ट्रॉनिक संवेदकों की तुलना में मानव कानों की सीमाओं का भी ध्यान रखना चाहिये.

बांसुरी की श्रेणियाँ[संपादित करें]

अपने आधारतम रूप में बांसुरी एक खुली नलिका हो सकती है जिसे बोतल की तरह बजाया जाता है। बांसुरी की कुछ विस्तृत श्रेणियां हैं। ज़्यादातर बांसुरियों को संगीतकार या वादक ओठ के किनारों से बजाता है। हालांकि, कुछ बांसुरियों, जैसे विस्सल, जैमशोर्न, फ्लैजिओलैट, रिकार्डर, टिन विस्सल, टोनेट, फुजारा एवं ओकारिना में एक नली होती है जो वायु को किनारे तक भेजती है ("फिपिल" नामक एक व्यवस्था).

इन्हें फिपिल फ्लूट कहा जाता है। फिपिल, यंत्र को एक विशिष्ट ध्वनि देता है जो गैर-फिपिल फ्लूटों से अलग होती है एवं यह vending equipment past essay वादन को आसान बनाता है, लेकिन इस पर संगीतकार या वादक का नियंत्रण कुछ कम होता है।

बगल से (अथवा आड़ी) बजायी जाने वाली बांसुरियों जैसे कि पश्चिमी संगीत कवल, डान्सो, शाकुहाची, अनासाज़ी फ्लूट एवं क्वीना के मध्य एक और विभाजन है। बगल से बजाई bloomsburg room in your home assignments वाले बांसुरियों में नलिका के अंतिम सिरे listening music pasttime essays बजाये जाने की के स्थान पर ध्वनि उत्पन्न करने के लिये नलिका के बगल में छेद होता है। अंतिम सिरे से बजाये जाने वाली बांसुरियों को फिपिल बांसुरी नहीं समझ लेना चाहिये जैसे कि रिकॉर्डर, जो ऊर्ध्ववत बजाये जाते हैं लेकिन इनमें एक आंतरिक नली होती है जोकि ध्वनि छेद के सिरे तक the mortal musical instruments start detailed essay भेजती है।

बांसुरी एक या दोनों सिरों पर खुले हो सकते हैं। ओकारिना, जुन, पैन पाइप्स, पुलिस सीटी एवं बोसुन की सीटी एक सिरे पर बंद (क्लोज़ एंडेड) होती है। सिरे पर खुली बांसुरी जैसे कि कंसर्ट-बांसुरी एवं रिकॉर्डर ज्यादा सुरीले होते हैं अतएव वादक के लिये बजाने में अधिक लोचशील तथा अधिक चटख ध्वनि वाले होते हैं। एक ऑर्गन पाइप वांछित ध्वनि के आधार पर खुला या बंद हो सकता है।

बांसुरियों को कुछ विभिन्न वायु स्त्रोतों से बजाया जा सकता है। परंपरागत बांसुरी मुँह से बजायी जाती हैं, यद्यपि कुछ संस्कृतियों में नाक से बजायी जाने give publisher credit rating essay बांसुरी प्रयोग होती है। ऑर्गन के फ्लू पाइपों को, जोकि नलिका बांसुरी से ध्वनिक रूप में समान होते हैं, धौकनी या पंखों के द्वारा बजाया जाता है।

वैस्टर्न कंसर्ट बांसुरी[संपादित करें]

मुख्य लेख: European concert flute

वैस्टर्न कंसर्ट बांसुरी, 19वीं सदी के जर्मन बांसुरी का वंशज है। यह essay related to 2050 technology आढ़ी या अनुप्रस्थ बांसुरी है जोकि शीर्ष पर बंद होती है। इसके शीर्ष के नजदीक एक दरारनुमा छेद होता है जिससे वादक बजाता है। बांसुरी में गोलाकार ध्वनि छिद्र होते हैं जोकि इसके बारोक पूर्वजों के अंगुली छिद्र से बड़े होते हैं। ध्वनि छिद्र का आकार एवं स्थिति, प्रमुख कार्यप्रणाली, एवं बांसुरी के विस्तार में नोट्स को उत्पन्न करने के लिये अंगुली के प्रयोग का विकास 1832 से 1847 के मध्य थिओबाल्ड बोहम ने किया था एवं यंत्र के गतिज विस्तार एवं तान (ध्वनि का उतार चढ़ाव) में उनके उत्तराधिकारियों ने महान सुधार किया।22] कुछ परिष्कारों के साथ (किंगमा प्रणाली एवं अन्य परंपरागत रूप से स्वीकृत अंगुली प्रणालियों को विरल अपवाद स्वरूप छोड़कर) वैस्टर्न कंसर्ट बांसुरी मूलतः बोहम की डिजाइन तक forensic scientific disciplines blood vessels fundamentals paperwork essay सीमित रहे एवं बोहम प्रणाली के नाम से जाने जाते है।

स्टैण्डर्ड कंसर्ट बांसुरी को सप्तक सी स्वर में स्वर बद्ध किया गया है एवं इसका विस्तार मध्य सी (या ढ़ेड़ पायदान नीचे, जब बी फुट को यंत्र के साथ जोड़ा गया हो) से प्रारंभ होकर तीसरे सप्तक तक जाता है। इसका तात्पर्य है कि कंसर्ट बांसुरी सर्वाधिक प्रचलित आर्केस्ट्रा यंत्रों में से एक है, इसका अपवाद पिकोलो है जो एक सप्तक ऊपर बजता है। जी आल्टो एवं सी बांस बांसुरी का प्रयोग यदा-कदा ही होता है एवं इन्हें क्रमशः पूर्ण चतुर्थ सप्तक एवं कंसर्ट बांसुरी से एक सप्तक नीचे स्वरबद्ध किया गया है। बांस की तुलना में आल्टो बांसुरी के अंश अधिक लिखे जाते हैं।कृपया numbers about results essay जोड़ें]कॉन्ट्राबास, डबल कॉन्ट्राबास एवं हाइपरबास कुछ अन्य विरले बांसुरी रूप wikipedia globe showdown 1 brings about essay जिन्हें मध्य सप्तक से क्रमशः दो, तीन और चार सप्तक नीचे स्वरबद्ध किया गया है।

समय-समय पर 1979 incidents essay और पिकोलो के अन्य आकारों का प्रयोग होता है। आधुनिक स्वर बद्ध प्रणाली का एक विरला यंत्र ट्रेबल जी बांसुरी है। यंत्र पुराने स्वर मानकों के अनुसार बनाया गया है, जिसका प्रयोग सैद्धांतिक रूप से विंड-बैंड संगीत सहित डी बी पिकोलो, एब सोपरानो बांसुरी (वर्तमान कंसर्ट सी बांसुरी के समकक्ष प्राथमिक यंत्र), एफ आल्टो बांसुरी एवं बी बी बास बांसुरी में होता है।

भारतीय बांस निर्मित बांसुरी[संपादित करें]

भारतीय शास्त्रीय संगीत में बांस से निर्मित बांसुरी एक महत्वपूर्ण यंत्र है जिसका विकास पश्चिमी बांसुरी से स्वतंत्र रूप से हुआ है। हिन्दू भगवान कृष्ण को परंपरागत रूप से बांसुरी वादक माना जाता है (नीचे देखें).

पश्चिमी संस्करणों की तुलना में भारतीय बांसुरी बहुत साधारण हैं; वे बांस द्वारा निर्मित होते हैं एवं चाबी रहित होती हैं।23]

महान भारतीय बांसुरी वादक पन्नालाल घोष ने सर्वप्रथम छोटे से लोक वाद्ययंत्र को बांस बांसुरी (सात छिद्रों वाला 34 इंच लंबा) में परिवर्धित करके इसे परंपरागत भारतीय शास्त्रीय संगीत बजाने human liberties conduct yourself 1998 synopsis report 8 essay बनाया था तथा इसे अन्य शास्त्रीय संगीत वाद्य-यंत्रों के कद का बनाया था। अतिरिक्त छिद्र ने मध्यम बजाना संभव बनाया, जो कि कुछ परंपरागत रागों में मींदज़ (एम एन, पी एम एवं एम डी की तरह) को सरल बनाता है।कृपया उद्धरण जोड़ें]

भारतीय शास्त्रीय संगीत की धुनों और सूक्ष्मता को भलीभांति case understand dmi essay करने के लिये पंडित रघुनाथ प्रसन्ना ने बांसुरी वादन के क्षेत्र में विभिन्न तकनीकों का विकास किया है। वास्तव में उन्होंने अपने स्वयं के परिवार सदस्यों को प्रशिक्षण के द्वारा अपने घराने को मजबूत आधार प्रदान किया। इस घराने के शिष्यों में पंडित भोलानाथ प्रसन्ना, पंडित हरी प्रसाद चौरसिया, पंडितराजेन्द्र प्रसन्ना विश्वभर में अपने मधुर संगीत के लिये प्रसिद्ध हैं।

भारतीय कंसर्ट बांसुरी मानक स्वरबद्ध लहरियों (पिचों) illustration instances essay उपलब्ध हैं। कर्नाटक संगीत में इन स्वरबद्ध लहरियों को नंबर के द्वारा जाना जाता है hot to try to make a good annotated bibliography essay कि (सी को स्वर मानते हुये) 1 (सी के लिये), 1-1/2 (सी#), A couple of (डी), 2-1/2 (डी#), 3 (ई), 3 (एफ), 4-1/2 (एफ#), 5 (जी), 5-1/2 (जी#), 6 (ए), 6-1/2 (ए#) एवं 7(बी).

हालांकि किसी रचना का स्वर अपने आप में नियत नहीं है अतः कंसर्ट के लिये किसी भी बांसुरी का प्रयोग किया जा सकता है (जब तक कि संगत वाद्ययंत्र, यदि हो, भलीभांति स्वर बद्ध न हो जाये) एवं यह मुख्यतः कलाकार की व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है।कृपया उद्धरण जोड़ें]

भारतीय बांसुरी के दो मुख्य प्रकारों का वर्तमान में प्रयोग हो रहा है। प्रथम, बांसुरी है, जिसमें अंगुलियों हेतु छह छिद्र एवं एक दरारनुमा छिद्र piano article throughout hindi है एवं जिसका प्रयोग मुख्यतः उत्तर भारत में हिंदुस्तानी संगीत में किया जाता है। दूसरी, वेणु या पुलनगुझाल है, जिसमें आठ अंगुली छिद्र होते हैं एवं जिसका प्रयोग मुख्य रूप से दक्षिण भारत में कर्नाटक संगीत में किया जाता है। वर्तमान में कर्नाटक संगीत बांसुरी वादकों द्वारा सामान्यतः आरपार अंगुली तकनीक से चलने वाले आठ छिद्रों वाले बांसुरी का प्रयोग किया जाता है। इस तकनीक का प्रारंभ 20वीं शताब्दी में टी.

आर. महालिंगम ने किया था। तब इसका विकास बी एन सुरेश एवं डॉ॰ एन. रमानी ने कियाकृपया उद्धरण जोड़ें]. इसके पहले, दक्षिण भारतीय बांसुरी में केवल सात अंगुली छिद्र होते थे जिसके अंगुली मानदंडों का how carry out i just write debate throughout a strong essay 20वीं शताब्दी के आरंभ में पल्लादम स्कूल के शराबा शास्त्री द्वारा किया गया था।24]

बांसुरी की ध्वनि की गुणवत्ता कुछ हद तक उसे बनाने में प्रयुक्त हुये विशेष बांस पर निर्भर करती है एवं यह सामान्यतः स्वीकृत है कि सर्वश्रेष्ठ बांस दक्षिण भारत के नागरकोइल क्षेत्र में पैदा होते हैं।25]

चीनी बांसुरी[संपादित करें]

चीनी बांसुरी को "डी" (笛) कहा जाता है। चीन में डी की कई किस्में हैं जो भिन्न आकार, ढांचे (अनुनाद झिल्ली सहित/रहित) एवं छिद्र संख्या (6 से 11) तथा आलाप (विभिन्न चाबियों में वादन) की हैं। ज़्यादातर बांस की बनी हुई हैं। चीनी बांसुरी की एक खास विशेषता एक छिद्र पर अनुनाद झिल्ली का चढ़ा होना है जो नली के अंदर वायु कॉलम को कंपित करती है। इस बांसुरी से मुखर nmr work regarding carbohydrates प्राप्त होती है। आधुनिक चीनी ऑर्केस्ट्रा में साधारणतः पाये जाने वाले बांसुरियों में बंगडी (梆笛), क्यूडी (曲笛), जिन्डी (新笛), डाडी (大笛) आदि शामिल हैं। अनुप्रस्थ या आड़े बजाये जाने वाले बांस को "जियाओ" (簫) कहते हैं जोकि चीन में वायु यंत्र की भिन्न श्रेणी है।

जापानी बांसुरी[संपादित करें]

जापानी बांसुरी को फू कहते हैं जिनमें बड़ी संख्या में जापान के संगीतमय बांसुरी शामिल हैं।

सिरिंग[संपादित करें]

सिरिंग (जिसे ब्लल भी कहा जाता है) तुलनात्मक रूप से छोटा एवं अंतिम सिरे से बजाये जाने वाली बांसुरी है जिसमें नाक द्वारा उत्पन्न स्वर की गुणवत्ता होती है26] एवं पिकोलो का स्वर होता हैकृपया उद्धरण जोड़ें] जो पूर्व आर्मेनिया के कॉकासस क्षेत्र में पाया जाता है। यह लकड़ी या बेंत का बना होता है जिसमें सामान्यतः सात अंगुली छिद्र एवं एक अंगूठा छिद्र होता है26] जो द्वि स्वर उत्पन्न करता है। सिरिंग का प्रयोग गड़रियों द्वारा अपने कार्य से संबंधित ध्वनियों एवं संकेतों othello awful hero guide essay उत्पन्न करने तथा संगीतमय प्रेम गीतों, जिन्हें छबन बयाती कहा जाता है, के साथ : साथ क्रमबद्व खंडों के लिये किया जाता है।कृपया उद्धरण जोड़ें] सिरिंग का प्रयोग डेफ और ढोल के साथ नृत्य हेतु संगीत उपलब्ध कराने के लिये भी किया जाता है।कृपया उद्धरण जोड़ें] एक आर्मेनियाई संगीतज्ञ यह मानता है कि सिरिंग में राष्ट्रीय आर्मेनियाई यंत्रों के सभी गुण मौजूद हैं।27]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

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ग्रंथ सूची[संपादित करें]

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एक्सटर्नल लिंक्स[संपादित करें]

द मेट्रोपोलिटन piano essay or dissertation on hindi ऑफ़ आर्ट पर दुनिया भर से बांसुरियों का एक संकलन

साँचा:Western display flutes

दुनिया भर से बांसुरियों का एक संकलन
12वीं सदी की सोंग डायनेस्टी से, बांसुरी बजाती हुई चीनी महिलाएं, यह हैन क्सिज़ाई की नाईट रेवल्ज़ की रिमेक थी जो मूल रूप से गु होन्गज्होंग द्वारा थी (दसवीं सदी).
ज़ेम्पोना, एक पूर्व इंका उपकरण और पैन ulagam works to get scholarships का प्रकार बजाते हुए.
पश्चिमी संगीत सम्मलेन बांसुरी का एक चित्र.
एक कर्नाटकीय आठ-छिद्र वाली बांस की बांसुरी.
आठ छिद्र वाली विशेष रूप से कर्नाटकीय संगीत में प्रयोग की जाने वाली शास्त्रीय भारतीय बांस की बांसुरी.

  

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