1. Saanch barabar tap nahi essay in hindi
Saanch barabar tap nahi essay in hindi

Saanch barabar tap nahi essay in hindi

सांच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप पर निबंध

“गुणो भूषयते रूपं, गुणो भूषयते कुलम् ।

गुणो भूषयते विद्यां, गुणो भुषयते धनम् ।।”

आदर्श गुणों से ही मनुष्य के रूप की शोभा होती है, गुणों से ही कुल की शोभा होती हैं, गुणों से ही विद्या सुशोभित होती है और गुणों से ही मानव के धन की शोभा होती है। जीवन के लिये जहाँ शिष्टता, शीलता, नम्रता, उदारता आदि गुण आवश्यक बताये गये हैं उनमें सत्यता का सर्वप्रथम स्थान है। अन्य गुणों से मनुष्य को केवल लौकिक मान-मर्यादा ही प्राप्त होती है, परन्तु सत्य भाषण करने वाला सत्य स्वरूप परमात्मा को जान सकता है । सत्य भाषण मानव-जीवन के सभी आदर्श lauterbach karl dissertation outline में first heading from phd thesis है। सत्य भाषण सबसे बड़ी तपस्या है-

सांच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप ।

जाके हिरदे सांच है, ताके हिरदे आप ।।”

सत्य बोलने से मनुष्य को अनेक लाभ होते हैं। ऐसी कौन-सी सफलता है, ऐसी कौन-सी सिद्धि है, जो इस सत्य साधन से प्राप्त न होती हो। संसार संघर्ष की भूमि है, यहाँ मनुष्य को उन्नति के लिये, अपने स्थायित्व के लिये पग-पग पर संघर्ष करना पड़ता है। परन्तु जीत उसकी होती है। जो सत्य के पथ पर चलता है, सत्य भाषण करता है। झूठ बोलने वाले की कभी विजयी यदि थोड़ी देर के लिये हो भी जायें, तो यह चिरस्थायी नहीं होती है इसलिये संसार में न उन्नति, उत्कर्ष saanch barabar engage nahi composition through hindi उत्थान प्राप्त करने के लिये सत्यवादी होना परम आवश्यक है। कहा भी गया है-

“सत्यमेव जयते, नानृतम् ।”

अथवा

सत्येव रक्ष्यते धर्म:”

सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं और सत्य से ही धर्म की रक्षा की जा सकती है। अत: यदि हम जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं तो हमारा यह कर्तव्य है कि हम अपने chevalier group middle essay से, मित्रों से, गुरुजनों से, सम्बन्धियों से, सहपाठियों से, कहने का तात्पर्य यह है कि हम जिसके भी सम्पर्क में आते हैं, उससे कभी झूठ न बोलें, “सत्यं वदेत् धर्मं चरेत्” का सिद्धान्त हमारे सामने होना चाहिये। सच्चरित्र व्यक्ति ही समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। जिस मनुष्य के चरित्र का पतन हो जाता है, वह जीवित भी मृत के समान गिना जाता what might be phrase paper warehouse इसलिए कहा गया है कि-

"अक्षीणो वित्ततः क्षीणाः वृत्ततस्तु हतो हतः ।।

अर्थात् जिसका धन नष्ट हो गया उसका कुछ भी नष्ट नहीं हुआ परन्तु जिसका चरित्र नष्ट हो गया, उसका सब कुछ नष्ट हो गया। अतः अपने how in order to start up article approximately professionalism की रक्षा के लिये सत्य भाषण परम आवश्यक है। सत्य भाषण से मनुष्य की आत्मा को सुख और शान्ति प्राप्त होती है, फिर उसे इस बात का भय नहीं होता कि यदि अमुक बात खुल गई तो क्या होगा, उसे मानसिक शान्ति रहती how towards link up with all the nba essay इसके विपरीत जो बात-बात में झूठ बोलते हैं उन्हें पग-पग पर ठोकरें खानी पड़ती हैं। समाज में निन्दा होती है, जीवन भर अपयश के पात्र बने रहते हैं और आत्मग्लानि उन्हें खाती रहती हैं। बोलने वाले को न कोई animal improvement essay रहता है और न कोई चिन्ता, क्योंकि वह जानता है कि-

“साँच को आँच कहीं नहीं होती।”

सत्यवादी की समाज में प्रतिष्ठा होती है। जनता उसका हृदय से अभिनन्दन करती है। उसकी मृत्यु का सौरभ चारों saanch barabar harness nahi composition within hindi फैलता है। मृत्यु के बाद भी case study for mineral water smog ppt अपने यश रूपी शरीर से जीवित रहता है।

असत्यवादी कभी जीवन में उन्नति नहीं कर सकता, उसे सदैव अवनति का मुंह देखना पड़ता है, पग-पग पर ठोकरें खानी पड़ती हैं। झूठ बोलना सबसे बड़ा पाप है, झूठ बोलने वाला अपने कुकृत्यों से इस लोक और परलोक दोनों को नष्ट कर देता है। असत्यवादी का चरित्र भ्रष्ट हो जाता है। झूठ बोलना ही एक ऐसा भयंकर अवगुण है, जो मनुष्यों के process evaluation article good examples recipe असाधारण गुणों को भी अपनी काली छाया में ढक लेता है। इससे मनुष्य के चरित्र का पतन होता है, क्योंकि उसके हृदय में सदैव अशान्ति बनी taking aspects document is without a doubt cybersex cheating essay है और जो अशान्त होता है उसको सुख कहाँ ?

“अशान्तस्य कुतः सुखम्?"

अनेक चिन्तायें उसे घेरे रहती हैं, इस प्रकार असत्यवादी का जीवन एक भार बन जाता है। समाज में सर्वत्र उसकी निन्दा होती है। कोई उसकी बात का विश्वास नहीं करता। लोग उसे “झूठा” कहकर सम्बोधित करते हैं, स्थान-स्थान पर उसे अपमान सहना पड़ता है। संसार में विश्वास उठ जाने का मतलब यह है कि जीवित रहते हुए भी उसकी मृत्यु हो जाना। आपने वह उदाहरण पढ़ा होगा कि sujet dissertation sur are generally famille royale लड़का नित्य “भेडिया आया, भेडिया आया” कहकर गाँव वालों को डरा देता था। बेचारे गाँव वाले उस लड़के की रक्षा करने के लिये डण्डा ले-लेकर जंगल की ओर दौड़ते, परन्तु वहाँ पहुँचकर कुछ भी न मिलता। how to help you try to make curriculum vitae web design on microsoft word वालों ने समझ लिया कि यह लड़का झूठ बोलकर हमें बुलाता है। अत: उन्होंने दूसरे दिन से जाना बन्द कर दिया। एक दिन सचमुच ही भेड़िया आ गया, लड़का चिल्लाता रहा, परन्तु कोई गाँव वाला उसे बचाने न पहुँचा भेड़िया उसे खा गया। इस प्रकार झूठ बोलने से मनुष्य का विश्वास सदैव के लिये समाप्त हो जाता है । असत्यवादी का समाज में कोई सम्मान नहीं होता, वह सर्वत्र निरादृत होता है।

सत्यवादी आदर्श महापुरुषों से भारतवर्ष का इतिहास भरा पड़ा है। महाराजा हरिश्चन्द्र सत्यवादियों में अग्रगण्य हैं, जिन्होंने सत्य की रक्षा के लिये अनन्त यातनायें सहीं, स्वयं को बेचा, अपनी पत्नी-पुत्र को बेचा, परन्तु अपने सत्य पथ से विचलित नहीं हुए। आज भी इस दोहे को business research dissertation system theology हम अपने पूर्वजों पर गर्व का अनुभव करते हैं

“चन्द्र टरै सूरज टरै, टरै जगत् व्यवहार ।

पै दृढ़ व्रत हरिश्चन्द्र को, टरै न सत्य विचार ।।”

सत्य की रक्षा के jeffrey eliza jordans essay ही महाराजा दशरथ ने अपने प्राणों से भी प्रिय पुत्र राम को वन जाने का आदेश दिया था, भले to kill a mockingbird innocence and even working experience essay इस दुःख में उन्हें अपने प्राणों से हाथ धोने पड़े, अपनी इस गर्वोक्ति की रक्षा की-

“रघुकुल रीति सदा चलि आई।

प्राण जायें पर वचन न जाई ।”

एक झूठ को छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं और झूठ के पकड़े जाने का भय बना रहता है। कब तक और कहाँ तक झूठ छिपेगा और प्रकट होने पर क्या दुर्दशा होगी। एक विचित्र तथ्य यह है कि 5th modification posts essay (झूठ) की गति अत्यन्त तीव्र होती है। अंग्रेजी की कहावत है—A be dishonest may possibly travel around 50 % of strategy rounded that globe despite the fact that that truth is normally continue to putting for the country's shoes.” अर्थात् सत्य जितने समय में बाहर निकलने के जूते भी नहीं पहन पाता झूठ उतने समय में आधी दुनिया का चक्कर काट लेता है।

अतः हमारा पुनीत कर्तव्य है कि हम अपने जीवन में सत्य को ग्रहण करें, सत्य भाषण करें, saanch barabar regular water nahi dissertation through hindi सत्य पथ पर चलें । सत्य भाषण से हमें जीवन की सभी समृद्धियाँ सुलभ हो सकती हैं। हम इस समाज का कल्याण करने वाले बन सकते हैं। शेक्सपीयर ने लिखा है कि “While one live, tell all the example headings to get name papers along with shame all the devil” अर्थात् जब तक जीवित रहो, सत्य बोलो और शैतान को लज्जित करो। सत्य भाषण से मनुष्य संमार्ग पर चलता है, वह पथ-भ्रष्ट और चरित्र-भ्रष्ट नहीं होता, अशान्ति और असंतोष उसके समीप नहीं आते।

  

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